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Mahashivratri 2026 Date: 15 या 16 फरवरी, कब है महाशिवरात्रि? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

 


Maha Shivratri 2026 kab hai: शिवरात्रि, हिंदू परंपरा का एक बहुत बड़ा पर्व है, जिसे फाल्गुन माह में मनाया जाता है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त... 

 Written by Brijesh Yadav 

नई दिल्ली February 6, 2026 

Mahashivratri 2026 शिव पुराण के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन शिवजी का प्राकट्य हुआ था। 

वैदिक पंंचांग के अनुसार हर साल यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन महादेव का प्राकट्य हुआ था। साथ ही इसी पावन तिथि पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मान्यता है जो व्यक्ति इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर महादेव की पूजा- अर्चना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। आपको बता दें कि इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। 

आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त… 

महाशिवरात्रि तिथि 2026 (Kab Hai Mahashivratri 2026) फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी, रविवार के दिन शाम को 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं अगले दिन यानी 16 फरवरी, सोमवार को शाम के 5 बजकर 34 मिनट चतुर्दशी तिथि व्याप्त होगी। ऐसे में महाशिवरात्रि का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

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*निशिथ काल का पूजा का समय-* 16 फरवरी की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 मिनट 

 *प्रथम प्रहर पूजन का समय* 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। 

 *दूसरा प्रहर पूजा का समय* 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से लेकर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

 *तीसरा प्रहर पूजा का समय* 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से लेकर सुबह 3 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। 

 *चौथा प्रहर पूजा का समय* 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

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*महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व* महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन महादेव की उपासना से व्यक्ति को सारे सुख प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही शास्त्रों के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे। वे एक विशाल अग्निस्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में आए, जिसका कोई आदि और अंत नहीं था। साथ ही महाशिवरात्रि की रात कुंडलिनी जागरण और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, जो साधकों को परम ज्ञान की ओर ले जाती है।

 डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। 

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